जम्मू-कश्मीर में एक दशक बाद हो रहे ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण से पहले रविवार को सात जिलों की 40 विधानसभा सीटों पर राजनीतिक प्रचार अपने चरम पर पहुंच गया। जम्मू संभाग के जम्मू, उधमपुर, कठुआ और सांबा जिलों के साथ-साथ उत्तरी कश्मीर के बारामूला, बांदीपोरा और कुपवाड़ा जिलों में फैले इस अंतिम चरण में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के शीर्ष नेताओं ने मतदाताओं को साधने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस निर्णायक चरण में 39.1 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता 415 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। पहले चरण में 61.38 प्रतिशत और दूसरे चरण में 57.31 प्रतिशत के उत्साहजनक मतदान के बाद, निर्वाचन आयोग ने शहरी केंद्रों, मैदानी इलाकों और नियंत्रण रेखा (LoC) तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में 5,060 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं।
जम्मू के मैदानों और उत्तरी कश्मीर में कड़ा मुकाबला
90 सदस्यीय विधानसभा के समीकरणों के लिहाज से तीसरे चरण की 40 सीटें अत्यंत निर्णायक मानी जा रही हैं। इनमें से 24 सीटें जम्मू, उधमपुर, कठुआ और सांबा के घनी आबादी वाले इलाकों में हैं, जबकि 16 सीटें उत्तरी कश्मीर के बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों में स्थित हैं। सप्ताहांत के दौरान आयोजित रैलियों और जनसभाओं में युवाओं के लिए रोजगार, बागवानी और औद्योगिक निवेश, पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली, बिजली दरों में राहत और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे मुद्दे प्रमुखता से छाए रहे।
उत्तरी कश्मीर के बारामूला और कुपवाड़ा जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क और शांतिपूर्ण माहौल ने चुनावी भागीदारी को नई ऊर्जा दी है। गुरेज, करनाह और उरी जैसे दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में उम्मीदवारों ने पहली बार मतदान कर रहे युवाओं, पहाड़ी और गुर्जर-बकरवाल समुदायों तथा सेब उत्पादक किसानों से सीधा संवाद किया है।
“जम्मू-कश्मीर के दोनों संभागों में मतदाताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी संवैधानिक लोकतंत्र और जमीनी स्तर के शासन में अटूट विश्वास को दर्शाती है।”
बहुस्तरीय सुरक्षा और समावेशी मतदान व्यवस्था
मतदान से पूर्व 48 घंटे की अनिवार्य प्रचार समाप्ति अवधि से पहले नागरिक और पुलिस प्रशासन ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के समन्वय से बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैनात किया है। सभी 5,060 मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और बुजुर्ग तथा दिव्यांग मतदाताओं के लिए रैंप व स्वयंसेवकों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
निर्वाचन आयोग ने महिला कर्मियों द्वारा संचालित पिंक बूथ, युवा-संचालित बूथ और पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन बूथ के अलावा जम्मू, उधमपुर और दिल्ली में कश्मीरी प्रवासी मतदाताओं के लिए विशेष मतदान केंद्र भी बनाए हैं। सभी 90 सीटों की मतगणना अक्टूबर की शुरुआत में निर्धारित है, जिससे एक दशक बाद जम्मू-कश्मीर की नई निर्वाचित सरकार की तस्वीर साफ होगी।




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