भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का पुनर्गठन करते हुए तीन प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों को चार साल के कार्यकाल के लिए बाहरी सदस्य के रूप में नियुक्त किया है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक प्रोफेसर राम सिंह, जाने-माने बाजार अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य और आईएसआईडी के निदेशक डॉ. नागेश कुमार को नया सदस्य बनाया गया है।
चार वर्ष के कार्यकाल के लिए तीन प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों का चयन
ये नए सदस्य निवर्तमान बाहरी सदस्यों प्रोफेसर आशिमा गोयल, डॉ. शशांक भिड़े और प्रोफेसर जयंत आर. वर्मा का स्थान लेंगे, जिनका चार साल का सफल कार्यकाल हाल ही में पूरा हुआ है।
ये तीनों बाहरी विशेषज्ञ आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास, डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा और कार्यकारी निदेशक राजीव रंजन के साथ मिलकर छह सदस्यीय समिति का हिस्सा बनेंगे, जो देश में बेंचमार्क रेपो दर तय करती है।
“प्रतिष्ठित अकादमिक और बाजार अर्थशास्त्रियों की नियुक्ति संतुलित और दूरदर्शी विचार-विमर्श सुनिश्चित करती है क्योंकि मौद्रिक नीति समिति मूल्य स्थिरता और सतत विकास को आगे बढ़ाती है।” — आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय
आर्थिक विकास को गति देने और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण की दोहरी चुनौती
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि नए सदस्यों के आने से समिति में नई सोच का समावेश होगा, जिससे मौजूदा 6.50% की रेपो दर में संभावित बदलाव और नीतिगत रुख में नरमी के संकेत मिल सकते हैं।
हालांकि भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है, लेकिन खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव और खुदरा मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत के लक्ष्य पर स्थिर रखना नई समिति के समक्ष मुख्य चुनौती होगी।
Frequently Asked Questions
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति में कौन से नए सदस्य शामिल हुए हैं?
प्रोफेसर राम सिंह, सौगत भट्टाचार्य और डॉ. नागेश कुमार को चार साल के लिए बाहरी सदस्य नियुक्त किया गया है।
मौद्रिक नीति समिति का मुख्य कार्य क्या होता है?
समिति देश में खुदरा महंगाई को नियंत्रित रखने और विकास को बढ़ावा देने के लिए बेंचमार्क रेपो रेट तय करती है।





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