भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र (UNGA 79) से इतर न्यूयॉर्क में ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा, जर्मनी की संघीय विदेश मंत्री अन्नालेना बेयरबॉक और जापान की विदेश मंत्री योको कामिकावा के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की। वार्षिक जी4 मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद चारों शीर्ष राजनयिकों ने संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ से पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल संरचनात्मक सुधार की मांग करते हुए एक व्यापक संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किया।

इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान चारों मंत्रियों ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा की और कहा कि बढ़ते सशस्त्र संघर्षों, मानवीय संकटों और आपूर्ति-श्रृंखला में व्यवधानों ने वर्तमान पंद्रह-सदस्यीय परिषद की संस्थागत सीमाओं को उजागर कर दिया है। जी4 समूह ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में सक्षम एक विस्तारित सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे की उम्मीदवारी के प्रति अपनी पारस्परिक प्रतिबद्धता दोहराई।

संयुक्त राष्ट्र में समयबद्ध और पाठ-आधारित वार्ता पर जोर

जी4 मंत्रिस्तरीय घोषणापत्र का मुख्य केंद्र लंबे समय से चल रही अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) प्रक्रिया को स्पष्ट समय-सीमा के साथ ठोस, पाठ-आधारित (टेक्स्ट-बेस्ड) वार्ता में बदलना था। पंद्रह वर्षों से अधिक समय से महासभा के भीतर सुरक्षा परिषद सुधार चर्चाएं किसी एकल समेकित वार्ता दस्तावेज के बिना चल रही हैं, जिससे सुधार प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हुई है।

न्यूयॉर्क में 'समिट ऑफ द फ्यूचर' के दौरान अपनाए गए 'पैक्ट फॉर द फ्यूचर' की गति को आगे बढ़ाते हुए जयशंकर और उनके समकक्षों ने स्पष्ट किया कि सुधार केवल अस्थायी सीटों तक सीमित नहीं रह सकता। मंत्रियों ने जोर देकर कहा कि स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों का विस्तार ही संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय की वैधता, प्रतिनिधित्व और प्रभावशीलता को बहाल कर सकता है।

“जी4 देश दोहराते हैं कि आज के जटिल वैश्विक संकटों से निपटने के लिए स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का व्यापक सुधार अपरिहार्य है।”

ग्लोबल साउथ और अफ्रीकी प्रतिनिधित्व का पुरजोर समर्थन

जी4 घोषणापत्र में कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से अफ्रीका के साथ-साथ लैटिन अमेरिका, कैरेबियन और एशिया-प्रशांत के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने पर भी विशेष बल दिया गया। चारों मंत्रियों ने एज़ुलविनी सर्वसम्मति (Ezulwini Consensus) और सिर्ते घोषणा (Sirte Declaration) में व्यक्त साझा अफ्रीकी स्थिति के प्रति अपना दृढ़ समर्थन दोहराया।

इसके अलावा, चारों देशों ने 79वें महासभा सत्र के दौरान विकासशील देशों के एल.69 समूह (L.69 Group) और अफ्रीकी संघ की सी-10 समिति सहित विभिन्न क्षेत्रीय गठबंधनों के साथ राजनयिक समन्वय तेज करने का संकल्प लिया। जी4 मंत्रियों ने चेतावनी दी कि 1945 के बाद के वैश्विक शासन ढांचे का आधुनिकीकरण न करने से दुनिया भर में बहुपक्षवाद पर विश्वास कम होने का जोखिम है।

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