अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब द्वारा विकसित ओरल कैप्सूल 'कोबेनफी' को मंजूरी दे दी है, जो सात दशकों से अधिक समय में सिज़ोफ्रेनिया के लिए पहली नई दवा है।

1950 के दशक में क्लोरप्रोमज़ाइन की खोज के बाद से अब तक की सभी एंटीसाइकोटिक दवाएं डोपामाइन डी2 रिसेप्टर्स को ब्लॉक करने पर आधारित थीं, जिससे मरीजों में हाथ कांपना, वजन बढ़ना और अत्यधिक सुस्ती जैसे गंभीर दुष्प्रभाव होते थे।

न्यूरोसाइंस में सात दशकों का सबसे क्रांतिकारी नवाचार

कोबेनफी (जिसे पहले KarXT के नाम से जाना जाता था) डोपामाइन को छुए बिना मस्करिनिक कोलीनर्जिक रिसेप्टर्स (M1 और M4) को सक्रिय करती है। इसमें ज़ैनोमेलिन और ट्रोस्पियम क्लोराइड का अनूठा संयोजन है।

यह अभिनव संयोजन मस्तिष्क में मतिभ्रम और भ्रम को नियंत्रित करता है, जबकि ट्रोस्पियम शरीर के बाकी हिस्सों में मतली या उल्टी जैसे दुष्प्रभावों को रोकता है।

“सिज़ोफ्रेनिया दुनिया भर में विकलांगता का बड़ा कारण रहा है, लेकिन इसका इलाज पीढ़ियों से नहीं बदला था। कोबेनफी मरीजों को एक सुरक्षित और नई उम्मीद देती है।”

क्लीनिकल परीक्षणों में असरदार और दुष्प्रभावों से मुक्त

तीसरे चरण के 'इमर्जेंट' क्लीनिकल परीक्षणों में कोबेनफी ने मतिभ्रम, भ्रम और सामाजिक अलगाव के लक्षणों को कम करने में उल्लेखनीय सफलता दर्ज की।

मनोचिकित्सकों और रोगी संगठनों ने इस मंजूरी को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि यह दवा मरीजों के नियमित दवा लेने की दर में भारी सुधार करेगी।

Sources