लक्ज़मबर्ग स्थित यूरोपीय संघ के न्याय न्यायालय (CJEU) ने हवाई यात्रियों के अधिकारों को मजबूत करते हुए एक महत्वपूर्ण बाध्यकारी फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी एयरलाइन के अपने पायलटों या केबिन क्रू द्वारा वेतन और कार्य शर्तों को लेकर की गई हड़ताल ईयू विनियमन 261/2004 के तहत 'असाधारण परिस्थितियों' की श्रेणी में नहीं आती है। इसलिए उड़ान रद्द होने या भारी देरी होने पर एयरलाइंस को यात्रियों को अनिवार्य मुआवजा देना होगा।

यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब कई यूरोपीय एयरलाइंस ने कर्मचारी यूनियनों की हड़ताल के कारण रद्द हुई उड़ानों के बाद यात्रियों को 250 से 600 यूरो का निर्धारित मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। विमानन कंपनियों का तर्क था कि यूनियन की हड़तालें उनके नियंत्रण से बाहर हैं और इन्हें खराब मौसम की तरह छूट मिलनी चाहिए।

ईयू विनियमन 261/2004 के तहत असाधारण परिस्थितियों की स्पष्ट व्याख्या

लक्ज़मबर्ग के न्यायाधीशों ने एयरलाइंस के इस तर्क को खारिज करते हुए आंतरिक और बाहरी श्रम विवादों के बीच स्पष्ट कानूनी अंतर स्थापित किया। न्यायालय ने कहा कि अपने ही कर्मचारियों के साथ वेतन, भत्तों और ड्यूटी रोस्टर को लेकर होने वाले मतभेद किसी भी एयरलाइन के सामान्य व्यावसायिक प्रबंधन का अभिन्न हिस्सा हैं।

चूंकि एयरलाइन प्रबंधन के पास यूनियनों के साथ समझौता करने और श्रम विवादों को सुलझाने का पूर्ण अधिकार होता है, इसलिए आंतरिक हड़ताल को अप्रत्याशित बाहरी घटना नहीं माना जा सकता। इसके विपरीत, सरकारी एयर ट्रैफिक कंट्रोलर या हवाई अड्डा सुरक्षा कर्मियों की बाहरी हड़तालें असाधारण परिस्थिति की छूट के दायरे में बनी रहेंगी।

“Internal industrial actions regarding employment terms form an inherent part of normal commercial management and cannot exempt air carriers from passenger compensation obligations under EU law.”

विमानन कंपनियों पर वित्तीय प्रभाव और यात्री अधिकारों की सुरक्षा

यूरोपीय उपभोक्ता संरक्षण संगठनों ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश के बाद जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और इटली की अदालतों में लंबित लाखों यूरो के मुआवजे के दावों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।

यह ऐतिहासिक फैसला यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों में समान रूप से लागू होगा, जिससे एयरलाइंस को श्रम विवादों को समय रहते बातचीत से सुलझाने और यात्रियों के हितों की रक्षा करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

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