भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को इस साल की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक देखने को मिली, जब बीएसई सेंसेक्स 1,769 अंक यानी 2.1 प्रतिशत लुढ़ककर 82,497 पर बंद हुआ। व्यापक एनएसई निफ्टी 50 भी 546 अंक गिरकर 25,250 के स्तर पर आ गया। इस तीव्र गिरावट से निवेशकों की लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति चंद घंटों में डूब गई।

बाजार में यह भीषण बिकवाली पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव की वजह से हुई, जिसने वैश्विक निवेशकों को जोखिम भरी संपत्तियों से दूर जाने पर मजबूर कर दिया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मात्र एक कारोबारी सत्र में 15,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के भारतीय शेयर बेच डाले।

भू-राजनीतिक संकट से शेयर बाजार से विदेशी पूंजी का भारी पलायन

भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतें 75 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंता पैदा कर रही हैं।

दलाल स्ट्रीट पर सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। रियल एस्टेट शेयरों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जबकि निजी बैंकिंग दिग्गजों और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई।

“पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने जोखिम से बचने की भावना को जन्म दिया है, जिसके चलते रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे सूचकांकों में विदेशी निवेशकों ने आक्रामक मुनाफावसूली की।” — नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मार्केट रिव्यू

बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट शेयरों में मची भगदड़

घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाजार को संभालने की कोशिश करते हुए 12,000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी की, लेकिन विदेशी निवेशकों की आक्रामक बिकवाली के सामने यह नाकाफी साबित हुई। बाजार में घबराहट मापने वाला इंडिया विक्स 9 प्रतिशत से अधिक उछल गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक परिस्थितियां, केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसले और तेल आपूर्ति की स्थिति आगे चलकर बाजार की दिशा तय करेंगे, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

Frequently Asked Questions

सेंसेक्स में 1,769 अंकों की भारी गिरावट का मुख्य कारण क्या था?

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष और कच्चे तेल के उछाल के कारण विदेशी निवेशकों ने आक्रामक बिकवाली की।

सत्र के दौरान विदेशी निवेशकों ने कितने रुपये के शेयर बेचे?

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने एकल कारोबारी सत्र में 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के भारतीय शेयर बेचे।

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