विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आधिकारिक तौर पर आर21/मैट्रिक्स-एम मलेरिया वैक्सीन को प्री-क्वालिफिकेशन का दर्जा प्रदान किया है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विनियामक मील का पत्थर है जो टीके की सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावकारिता की पुष्टि करता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) द्वारा बड़े पैमाने पर निर्मित यह टीका दूसरा प्री-क्वालिफाइड मलेरिया रोधी टीका बन गया है।

डब्ल्यूएचओ प्री-क्वालिफिकेशन संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) और अन्य बहुपक्षीय खरीद एजेंसियों के लिए गरीब और विकासशील देशों की ओर से थोक में टीकों की खरीद करने की अनिवार्य पूर्व शर्त है। इसके अलावा, गावी वैक्सीन अलायंस के माध्यम से अफ्रीकी देशों को नियमित टीकाकरण के लिए वित्तीय सब्सिडी भी मिल सकेगी।

डब्ल्यूएचओ प्री-क्वालिफिकेशन से वैश्विक खरीद और वितरण आसान

मलेरिया मानव इतिहास की सबसे घातक परजीवी बीमारियों में से एक है, जिससे हर साल 6 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। इनमें से लगभग 80 प्रतिशत मौतें पांच वर्ष से कम उम्र के अफ्रीकी बच्चों की होती हैं। आर21 वैक्सीन में नोवावैक्स का नोवेल एडजुवेंट मैट्रिक्स-एम शामिल है, जो मच्छरों से फैलने वाले प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम परजीवी के खिलाफ मजबूत प्रतिरक्षा पैदा करता है।

बुर्किना फासो, केन्या, माली और तंजानिया में किए गए व्यापक क्लिनिकल परीक्षणों में पाया गया कि बरसात के मौसम से पहले दिए जाने पर आर21 वैक्सीन 12 महीनों में 77 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान करती है। एक साल बाद दी जाने वाली बूस्टर खुराक इस सुरक्षा को लंबे समय तक बनाए रखती है।

“आर21 के लिए डब्ल्यूएचओ प्री-क्वालिफिकेशन प्राप्त करना वैश्विक स्वास्थ्य समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता है, जो अफ्रीका के लाखों बच्चों तक जीवनरक्षक खुराक पहुंचाना सुनिश्चित करेगी।” — अदार पूनावाला, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया

सस्ती और बड़े पैमाने पर उत्पादन से बच्चों की जान बचाने में मदद

आर21 वैक्सीन का सबसे बड़ा लाभ इसकी कम लागत और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है। दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ने प्रति वर्ष 10 करोड़ से अधिक खुराक तैयार करने की क्षमता पहले ही विकसित कर ली है, जिसकी कीमत चार डॉलर प्रति खुराक से भी कम रखी गई है।

पूर्व में स्वीकृत आरटीएस,एस के साथ अब दो प्री-क्वालिफाइड टीकों की उपलब्धता से वैश्विक स्तर पर टीकों की भारी कमी दूर हो गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस टीके के व्यापक वितरण से हर साल लाखों नवजात बच्चों को असमय मौत से बचाया जा सकेगा।

Frequently Asked Questions

डब्ल्यूएचओ प्री-क्वालिफिकेशन क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

यह प्रमाणन पुष्टि करता है कि टीका सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा है, जिससे यूनिसेफ जैसी संस्थाएं इसे वैश्विक स्तर पर खरीद सकती हैं।

आर21/मैट्रिक्स-एम मलेरिया वैक्सीन कितनी प्रभावी है?

परीक्षणों में पाया गया कि तीन खुराक और एक बूस्टर के साथ यह उच्च-संक्रमण वाले क्षेत्रों में 77 प्रतिशत तक प्रभावकारिता दिखाती है।

Sources