विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एमपॉक्स के लिए अपने आपातकालीन उपयोग सूची (ईयूएल) तंत्र के तहत पहले इन विट्रो डायग्नोस्टिक टेस्ट को औपचारिक मंजूरी दे दी है। एबॉट रीयलटाइम एम2000 एमपॉक्स जांच की यह मंजूरी क्लेड 1बी वायरस के बढ़ते प्रसार को रोकने और वैश्विक निगरानी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
इस आपातकालीन प्रक्रिया के अंतर्गत यह मॉलिक्यूलर टेस्ट मरीजों के त्वचा घावों से लिए गए नमूनों में एमपॉक्स वायरल डीएनए की सटीक पहचान करता है। इस फैसले से पहले कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और पड़ोसी देशों के अस्पतालों को नमूनों की जांच के लिए दूरदराज की केंद्रीय प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता था।
आपातकालीन सूची से तेज जांच का मार्ग प्रशस्त
एबॉट का यह परीक्षण उन स्वचालित एम2000 मशीनों पर संचालित होता है, जो एचआईवी और हेपेटाइटिस निगरानी के लिए पहले से ही अफ्रीकी चिकित्सा केंद्रों में बड़े पैमाने पर स्थापित हैं। इससे बिना भारी भरकम खर्च किए स्थानीय स्तर पर तुरंत जांच शुरू की जा सकेगी।
महामारी विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण चक्र को तोड़ने और पुष्ट मरीजों को तत्काल एंटीवायरल दवाएं उपलब्ध कराने के लिए समय पर सटीक जांच मिलना अत्यंत आवश्यक है।
“Access to quality-assured diagnostics is the cornerstone of outbreak control. This first EUL test will significantly expand testing capacity in affected countries.” — युकिओ नाकातानी, दवाओं और स्वास्थ्य उत्पादों की पहुंच के लिए डब्ल्यूएचओ की सहायक महानिदेशक
अफ्रीकी प्रयोगशाला नेटवर्क और निगरानी को मजबूती
यूनिसेफ, ग्लोबल फंड और गावी जैसी अंतरराष्ट्रीय खरीद एजेंसियां अब अलग-अलग देशों की मंजूरी का इंतजार किए बिना सीधे इन किटों की आपूर्ति कर सकती हैं, जिससे जांच का परिणाम हफ्तों के बजाय 48 घंटे के भीतर मिल सकेगा।
डब्ल्यूएचओ ने पुष्टि की है कि दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक जांच की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अन्य रैपिड टेस्टिंग उपकरणों का भी तकनीकी मूल्यांकन किया जा रहा है।
Frequently Asked Questions
डब्ल्यूएचओ ने किस एमपॉक्स टेस्ट को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी है?
डब्ल्यूएचओ ने एबॉट रीयलटाइम एम2000 एमपॉक्स पीसीआर टेस्ट को आपातकालीन उपयोग सूची में शामिल किया है।
इस मंजूरी से अफ्रीकी देशों में प्रकोप नियंत्रण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
अस्पतालों में पहले से मौजूद मशीनों पर जांच संभव होगी और जांच परिणाम 48 घंटे के भीतर उपलब्ध हो जाएंगे।





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