भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इक्विटी इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए व्यापक छह सूत्रीय नियामक सुधारों को औपचारिक मंजूरी दे दी है। मुंबई स्थित मुख्यालय में आयोजित बोर्ड बैठक में लिए गए इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) बाजार में खुदरा निवेशकों को हो रहे भीषण आर्थिक नुकसान पर अंकुश लगाना है।
नए नियमों के तहत इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए न्यूनतम अनुबंध मूल्य ₹5 लाख से बढ़ाकर सीधे ₹15 लाख कर दिया गया है, जिसे बाद के चरणों में ₹20 लाख तक बढ़ाया जा सकता है। अनुबंध के आकार में तीन गुना वृद्धि का उद्देश्य कम पूंजी वाले छोटे निवेशकों को अत्यधिक लीवरेज वाले सट्टेबाजी सौदों से दूर रखना है।
खुदरा सट्टेबाजी में भारी उछाल के बाद नियामक ने उठाया सख्त सुधारात्मक कदम
एक अन्य बड़े संरचनात्मक बदलाव के तहत प्रत्येक एक्सचेंज को केवल एक ही बेंचमार्क इंडेक्स पर साप्ताहिक एक्सपायरी अनुबंध जारी करने की अनुमति दी गई है। वर्तमान में प्रतिदिन अलग-अलग इंडेक्स की एक्सपायरी के चलते सट्टेबाजी चरम पर पहुंच गई थी, जिससे 93 प्रतिशत से अधिक खुदरा व्यापारियों को शुद्ध घाटा हो रहा था।
बोर्ड ने ऑप्शंस खरीदारों से अग्रिम प्रीमियम संग्रह को भी अनिवार्य कर दिया है। ब्रोकरों द्वारा ग्राहकों को इंट्राडे क्रेडिट या बिना मार्जिन के ऑप्शंस खरीदने की छूट समाप्त कर दी गई है, जिससे केवल वास्तविक पूंजी के आधार पर ही सौदे किए जा सकेंगे।
“घरेलू बचत का उत्पादक पूंजी निर्माण के बजाय सट्टेबाजी वाले डेरिवेटिव्स में बहना व्यापक आर्थिक जोखिम पैदा करता है। ये उपाय खुदरा प्रतिभागियों के लिए विवेकपूर्ण सुरक्षा बहाल करते हैं।” — माधबी पुरी बुच, चेयरपर्सन, सेबी
पूंजी की बढ़ी सीमा और सख्त मार्जिन नियमों से बदलेगा बाजार का ढांचा
सेबी के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वित्तीय वर्षों में भारतीय खुदरा कारोबारियों को इक्विटी डेरिवेटिव्स में ₹1.8 लाख करोड़ से अधिक का शुद्ध घाटा हुआ। सरकार और नियामकों ने चिंता जताई थी कि वित्तीय जुए की यह प्रवृत्ति घरेलू बचत को बैंक जमा और म्यूचुअल फंड जैसे सुरक्षित विकल्पों से भटका रही है।
इन नए नियमों का चरणबद्ध क्रियान्वयन 20 नवंबर 2024 से शुरू होगा, जिससे एक्सचेंजों और ब्रोकरेज फर्मों को आवश्यक तकनीकी समायोजन का समय मिल सके। विश्लेषकों का मानना है कि इससे रोजाना के वॉल्यूम में कमी आएगी लेकिन संस्थागत स्थिरता और सुरक्षा काफी मजबूत होगी।
Frequently Asked Questions
सेबी के नए नियमों के तहत न्यूनतम इंडेक्स डेरिवेटिव अनुबंध आकार क्या है?
न्यूनतम अनुबंध आकार ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख कर दिया गया है, जिसे आगे ₹20 लाख तक बढ़ाया जा सकता है।
एक्सचेंजों पर साप्ताहिक एक्सपायरी अनुबंधों पर क्या पाबंदी लगाई गई है?
अब प्रत्येक स्टॉक एक्सचेंज को प्रति सप्ताह केवल एक बेंचमार्क इंडेक्स पर ही वीकली एक्सपायरी अनुबंध उपलब्ध कराने की अनुमति होगी।





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