रवांडा गणराज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अमेरिकी सबिन वैक्सीन इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित मारबर्ग वायरस के खिलाफ प्रायोगिक टीके की लगभग 700 खुराकों की पहली आपातकालीन खेप प्राप्त कर ली है। राजधानी किगाली में टीकों का यह आगमन देश में फैले उस घातक संक्रमण से निपटने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जिसने अब तक 11 लोगों की जान ले ली है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) के समन्वय से स्वास्थ्य अधिकारियों ने लक्षित 'रिंग टीकाकरण' रणनीति शुरू कर दी है। इसके तहत पहले चरण में सबसे अधिक जोखिम वाले अग्रिम पंक्ति के डॉक्टरों, नर्सों, एम्बुलेंस कर्मियों और संक्रमितों के निकट संपर्क में आए लोगों को टीका दिया जा रहा है।

प्रायोगिक टीकों की तत्काल तैनाती से अग्रिम पंक्ति के डॉक्टरों को मिली सुरक्षा

मारबर्ग वायरस इबोला परिवार से संबंधित एक बेहद संक्रामक और जानलेवा रक्तस्रावी बुखार है, जिसकी मृत्यु दर पूर्व के प्रकोपों में 88 प्रतिशत तक देखी गई है। इस प्रकोप में 70 प्रतिशत से अधिक मामले स्वास्थ्यकर्मियों में पाए गए हैं, जिससे अस्पतालों की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए उनका सुरक्षित रहना सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है।

सबिन संस्थान का यह टीका चिम्पांजी एडेनोवायरस वेक्टर (cAd3) तकनीक पर आधारित है, जो मारबर्ग वायरस के ग्लाइकोप्रोटीन को लक्षित करता है। अमेरिका और युगांडा में हुए पहले चरण के मानव परीक्षणों में इस टीके ने बिना किसी गंभीर दुष्प्रभाव के मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया दिखाई थी।

“हमारे अग्रिम पंक्ति के डॉक्टरों और नर्सों का टीकाकरण संक्रमण की कड़ियों को तोड़ने के लिए आवश्यक है। हम इस प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए सभी स्वास्थ्य उपायों को तैनात कर रहे हैं।” — सबिन न्सान्जिमाना, स्वास्थ्य मंत्री, रवांडा

संपर्क ट्रेसिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से प्रकोप को रोकने की तेज कोशिशें

टीकाकरण अभियान के साथ-साथ रवांडा ने प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के लिए सैकड़ों निगरानी दलों को तैनात किया है। प्रायोगिक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी और एंटीवायरल दवाओं से लैस विशेष उपचार केंद्रों में मरीजों को गहन चिकित्सा सहायता दी जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों ने रवांडा की त्वरित पारदर्शिता, जीनोम अनुक्रमण साझा करने और कठोर रोकथाम उपायों की सराहना की है। यह पहल न केवल चिकित्सा कर्मियों की रक्षा कर रही है बल्कि सक्रिय महामारी के दौरान टीकों के वैज्ञानिक मूल्यांकन का नया मानक भी स्थापित कर रही है।

Frequently Asked Questions

सबिन वैक्सीन इंस्टीट्यूट द्वारा रवांडा को किस प्रकार का मारबर्ग टीका दिया गया है?

रवांडा को चिम्पांजी एडेनोवायरस वेक्टर (cAd3) पर आधारित प्रायोगिक सिंगल-डोज मारबर्ग वायरस टीका प्राप्त हुआ है।

प्रारंभिक चरण में यह मारबर्ग टीका किसे दिया जा रहा है?

यह टीका सबसे पहले संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों, नर्सों और उनके सीधे संपर्क में आए लोगों को रिंग वैक्सीनेशन के तहत दिया जा रहा है।

Sources