जापान के नवनियुक्त प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने बैंक ऑफ जापान द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने पर सावधानी बरतने की सलाह देकर वित्तीय बाजारों को चौंका दिया, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में भारी गिरावट दर्ज की गई।
टोक्यो स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में बैंक ऑफ जापान (बीओजे) के गवर्नर काज़ुओ उएदा के साथ अपनी पहली औपचारिक बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए इशिबा ने स्पष्ट कहा कि घरेलू आर्थिक परिस्थितियां फिलहाल अतिरिक्त दर वृद्धि के अनुकूल नहीं हैं।
इशिबा के अप्रत्याशित नरम रुख से विदेशी मुद्रा बाजारों में येन धड़ाम
इस बयान के बाद जापानी येन डॉलर के मुकाबले फिसलकर 146.50 के स्तर से नीचे आ गया। इससे पहले बाजार यह मानकर चल रहा था कि इशिबा के कड़े रुख के कारण केंद्रीय बैंक को तेजी से दरें बढ़ाने की पूरी छूट मिलेगी।
बैठक के बाद गवर्नर उएदा ने भी संयमित रुख अपनाते हुए दोहराया कि हालांकि केंद्रीय बैंक का दीर्घकालिक लक्ष्य मौद्रिक नीति को सामान्य बनाना है, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजारों की अस्थिरता को देखते हुए निर्णय लेने के लिए उनके पास पर्याप्त समय है।
“मुझे नहीं लगता कि मौजूदा आर्थिक माहौल में हमें और अधिक ब्याज दरें बढ़ाने की आवश्यकता है, और हमारी प्राथमिकता वेतन वृद्धि और घरेलू आर्थिक जीवन शक्ति को बनाए रखना है।” — शिगेरू इशिबा, प्रधानमंत्री, जापान
सरकार और केंद्रीय बैंक ने वास्तविक मजदूरी वृद्धि को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
बाजार में मची हलचल के बाद आर्थिक पुनरुद्धार मंत्री र्योसेई अकाज़ावा ने सफाई देते हुए कहा कि सरकार बैंक ऑफ जापान की स्वायत्तता का पूरा सम्मान करती है और दोनों संस्थान तीन दशक पुरानी अपस्फीति को हमेशा के लिए समाप्त करने के लक्ष्य पर एकजुट हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अक्टूबर के अंत में होने वाले मध्यावधि आम चुनावों के मद्देनजर इशिबा कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहते जिससे शेयर बाजार प्रभावित हो या घरेलू परिवारों पर कर्ज का बोझ बढ़े।
Frequently Asked Questions
प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने ब्याज दरों पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि वर्तमान आर्थिक स्थिति अतिरिक्त दर वृद्धि के लिए उपयुक्त नहीं है और सरकार की प्राथमिकता वेतन वृद्धि बनाए रखना है।
इस बयान से विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार पर क्या असर पड़ा?
निकट अवधि में दर वृद्धि टलने की संभावना से जापानी येन में डॉलर के मुकाबले 1.5 प्रतिशत से अधिक की तेज गिरावट आई।





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