जापान के नवनियुक्त प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने बुधवार सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ अपनी पहली औपचारिक टेलीफोन वार्ता की। इस दौरान दोनों नेताओं ने जापान-अमेरिका सुरक्षा गठबंधन की प्रतिरोधक और संयुक्त संचालन क्षमताओं को व्यापक रूप से मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
जापानी संसद द्वारा देश के 102वें प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाने के कुछ ही समय बाद आयोजित इस 20 मिनट की बातचीत ने पूर्वी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वाशिंगटन और टोक्यो की रणनीतिक साझेदारी की निरंतरता को प्रदर्शित किया।
नेतृत्व परिवर्तन के बाद पहली औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत
दोनों सरकारों द्वारा जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार, इशिबा और बाइडन ने सैन्य कमान और नियंत्रण संरचनाओं का आधुनिकीकरण करने, दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और आधुनिक रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन को तेज करने की प्रतिबद्धता जताई।
राष्ट्रपति बाइडन ने द्विपक्षीय सुरक्षा संधि के अनुच्छेद 5 के तहत जापान की रक्षा के लिए अमेरिका की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और स्पष्ट किया कि इसमें पूर्वी चीन सागर के सेनकाकू द्वीप भी शामिल हैं, जिन पर अमेरिकी परमाणु और पारंपरिक सुरक्षा छतरी लागू होती है।
“प्रधानमंत्री इशिबा और राष्ट्रपति बाइडन ने हमारी वैश्विक साझेदारी को और ऊंचा उठाने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के अपने साझा संकल्प को रेखांकित किया।” — विदेश मंत्रालय, जापान सरकार
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में त्रिपक्षीय सहयोग और सैन्य आधुनिकीकरण
नेताओं ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल के साथ त्रिपक्षीय सुरक्षा सहयोग को और प्रगाढ़ करने पर विशेष बल दिया, ताकि वर्ष 2023 के ऐतिहासिक कैंप डेविड शिखर सम्मेलन में स्थापित संस्थागत व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए मिसाइल खतरों से निपटा जा सके।
राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के जाने-माने विशेषज्ञ और पूर्व रक्षा मंत्री इशिबा ने आगामी आसियान और एपेक शिखर सम्मेलनों के दौरान राष्ट्रपति बाइडन के साथ व्यक्तिगत रूप से द्विपक्षीय बैठक करने की इच्छा भी व्यक्त की।
Frequently Asked Questions
पीएम इशिबा और राष्ट्रपति बाइडन के बीच मुख्य चर्चा किस विषय पर हुई?
दोनों नेताओं ने जापान-अमेरिका सुरक्षा गठबंधन और हिंद-प्रशांत में रक्षा समन्वय को मजबूत करने पर सहमति जताई।
क्या बातचीत में दक्षिण कोरिया के साथ संबंधों पर भी चर्चा हुई?
हां, दोनों नेताओं ने दक्षिण कोरिया के साथ त्रिपक्षीय सुरक्षा सहयोग को और अधिक गहरा करने का संकल्प लिया।





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