न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र (UNGA 79) की आम बहस में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक संतुलित और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पुरजोर आह्वान किया, जिसमें 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की आकांक्षाओं को केंद्र में रखा जाए। अपने संबोधन की शुरुआत 'ॐ नमः शिवाय' और 'नमस्कार' के साथ करते हुए जयशंकर ने आगाह किया कि भू-राजनीतिक संघर्षों, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक असमानताओं का सबसे गंभीर बोझ विकासशील देशों को उठाना पड़ रहा है।

जयशंकर ने कहा कि वैश्वीकरण के नाम पर विनिर्माण और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं का कुछ ही देशों में अत्यधिक केंद्रीकरण हो गया है, जिससे एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के अनेक देश अनुचित व्यापार शर्तों और गैर-प्रशुल्क बाधाओं के शिकार हुए हैं। उन्होंने भारत के 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) मॉडल का उदाहरण देते हुए प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण और आत्मनिर्भर आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण पर बल दिया।

सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा प्रहार और शांति की अपील

सुरक्षा चुनौतियों पर बोलते हुए विदेश मंत्री ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश दिया। पाकिस्तान की नीतियों की ओर स्पष्ट संकेत करते हुए जयशंकर ने कहा कि जहां भारत तेजी से आर्थिक और तकनीकी प्रगति कर रहा है, वहीं पड़ोस में राज्य-प्रायोजित आतंकवाद की नीति ने खुद उस समाज को अंदर से खोखला कर दिया है और बुरे कर्मों का फल अवश्य मिलता है।

यूक्रेन और मध्य पूर्व के संघर्षों पर जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को दोहराया कि 'यह युद्ध का युग नहीं है' और किसी भी विवाद का समाधान रणभूमि में नहीं खोजा जा सकता। उन्होंने संवाद और कूटनीति के जरिए शांति स्थापित करने में भारत के पूर्ण सहयोग की प्रतिबद्धता जताई।

“जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था एक पुराने युग में जमी हुई है, तब दुनिया के बड़े हिस्से को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। सच्चे बहुपक्षवाद के लिए ग्लोबल साउथ को आवाज और प्रतिनिधित्व देना अनिवार्य है।” — डॉ. एस. जयशंकर, विदेश मंत्री, भारत सरकार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और 'विश्वबंधु' का दृष्टिकोण

1945 में मात्र 51 सदस्य देशों के साथ गठित संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए जयशंकर ने कहा कि आज 193 सदस्य देशों वाली इस संस्था की सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों का विस्तार समय की सबसे बड़ी मांग है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने भारत की 'विश्वबंधु' की विदेश नीति को रेखांकित किया, जिसके तहत भारत ने जी-20 में अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाने, आपदा राहत अभियानों और वैक्सीन मैत्री के माध्यम से मानव-केंद्रित वैश्वीकरण की मिसाल पेश की है।

Frequently Asked Questions

UNGA 79 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भाषण के मुख्य बिंदु क्या थे?

डॉ. एस. जयशंकर ने ग्लोबल साउथ के लिए आर्थिक न्याय, विकेंद्रीकृत आपूर्ति श्रृंखला, सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार पर मुख्य रूप से जोर दिया।

एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका को किस रूप में परिभाषित किया?

उन्होंने भारत को 'विश्वबंधु' (दुनिया का एक विश्वसनीय मित्र और साझेदार) बताते हुए मानव-केंद्रित सहयोग और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

Sources