भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों ने मंगलवार को छह दिनों से जारी भारी गिरावट के सिलसिले पर ब्रेक लगा दिया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति के फैसले से ठीक पहले बैंकिंग, ऑटो और कंज्यूमर शेयरों में हुई जोरदार खरीदारी से बाजार में रौनक लौट आई।

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 584.81 अंक यानी 0.72 प्रतिशत की बढ़त के साथ 81,634.81 पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला निफ्टी 217.40 अंक यानी 0.88 प्रतिशत चढ़कर एक बार फिर 25,000 के अहम स्तर को पार करते हुए 25,013.15 पर बंद हुआ।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की लिवाली से थमी विदेशी फंडों की बिकवाली

इस जोरदार तकनीकी सुधार ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है, जो पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारी बिकवाली के चलते पिछले एक हफ्ते में लाखों करोड़ रुपये गंवा चुके थे।

बाजार की इस वापसी में निजी बैंकों की अहम भूमिका रही, जिसमें एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में अच्छी तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो दिग्गज टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी सूचकांक को सहारा दिया।

“After days of intense foreign institutional selling, domestic institutional support and optimistic expectations around monetary policy stance helped market benchmarks stage a decisive technical rebound.” — Prashanth Tapse, Senior Vice President of Research at Mehta Equities

आरबीआई के मौद्रिक नीति रुख में संभावित बदलाव पर टिकी नजरें

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि आरबीआई बुधवार को रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर यथावत रख सकता है, लेकिन वह अपने रुख को 'अकोमोडेशन वापस लेने' से बदलकर 'न्यूट्रल' कर सकता है, जिससे आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती का रास्ता साफ होगा।

व्यापक बाजार में भी सकारात्मक रुझान देखा गया, जहां बीएसई मिडकैप सूचकांक 1.07 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 2 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ, जो त्योहारी सीजन से पहले निवेशकों के लौटते भरोसे को दर्शाता है।

Frequently Asked Questions

मंगलवार को शेयर बाजार में उछाल की मुख्य वजह क्या रही?

बैंकिंग और ऑटो शेयरों में निचले स्तरों पर खरीदारी तथा आरबीआई बैठक से सकारात्मक उम्मीदों के चलते बाजार संभला।

आरबीआई की मौद्रिक नीति से बाजार को क्या उम्मीदें हैं?

बाजार को उम्मीद है कि रेपो रेट 6.5% पर स्थिर रहेगा, लेकिन नीतिगत रुख को बदलकर न्यूट्रल किया जा सकता है।

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