यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी के औद्योगिक क्षेत्र में मंदी और गहरी हो गई है। एसएंडपी ग्लोबल और हैम्बर्ग कमर्शियल बैंक (HCOB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जर्मनी का मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) सितंबर में गिरकर 40.6 पर आ गया, जो अगस्त में 42.4 था। यह पिछले एक साल में फैक्टरी गतिविधियों में सबसे तेज संकुचन है।
पीएमआई सूचकांक में 50 से नीचे का स्तर गतिविधियों में गिरावट को दर्शाता है। सितंबर के आंकड़ों से पता चला है कि नए घरेलू ऑर्डर्स, निर्यात बुकिंग और फैक्टरी आउटपुट में भारी गिरावट आई है, जिससे जर्मन कारखानों पर संकट गहरा गया है।
पिछले बारह महीनों में औद्योगिक उत्पादन में सबसे भारी गिरावट
इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण जर्मनी के प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल और मशीनरी क्षेत्र में आई कमजोरी है। यूरोपीय संघ में इलेक्ट्रिक वाहनों की घटती मांग और चीनी निर्माताओं से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते वाहन निर्माताओं ने उत्पादन में कटौती की है।
मांग में गिरावट के अलावा महंगी बिजली और ऊर्जा बदलाव की ऊंची लागत भी भारी रसायनों और धातुकर्म उद्योगों के मुनाफे को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
“The persistent downturn in Germany's manufacturing engine has deepened, driven primarily by weakness across the automotive supply chain and capital goods sector.” — Cyrus de la Rubia, Chief Economist at Hamburg Commercial Bank
ऑटोमोबाइल संकट और ऊर्जा लागत से कारखानों पर बढ़ता दबाव
सर्वेक्षण के रोजगार आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनियों ने मध्य 2020 के बाद से सबसे तेजी से कर्मचारियों की छंटनी की है। कई बड़ी कंपनियों ने नई भर्तियों पर रोक लगा दी है और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजनाएं शुरू की हैं।
इन कमजोर आंकड़ों के कारण विश्लेषकों का मानना है कि जर्मनी की अर्थव्यवस्था 2024 के अंत तक तकनीकी मंदी में प्रवेश कर सकती है, जिससे पूरे यूरोज़ोन में चिंताएं बढ़ गई हैं।
Frequently Asked Questions
सितंबर में जर्मनी का विनिर्माण पीएमआई कितना रहा?
सितंबर में जर्मनी का विनिर्माण पीएमआई गिरकर 40.6 पर आ गया, जो अगस्त में 42.4 दर्ज किया गया था।
जर्मन कारखानों में गिरावट के मुख्य कारण क्या हैं?
वाहन मांग में तेज गिरावट, कमजोर वैश्विक निर्यात और ऊंची बिजली दरें इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं।





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