दुनिया की प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी7 (G7) के राष्ट्राध्यक्षों ने बुधवार दोपहर पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट पर एक आपातकालीन वर्चुअल शिखर बैठक की। बैठक में ईरान के मिसाइल हमलों और लेबनान में जमीनी सैन्य कार्रवाई के बाद कूटनीतिक संयम बरतने की जोरदार अपील की गई।
यह महत्वपूर्ण बैठक जी7 की वर्तमान अध्यक्ष और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी द्वारा बुलाई गई थी। इस उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया।
इटली की अध्यक्षता में राष्ट्राध्यक्षों का आपातकालीन कूटनीतिक मंथन
विचार-विमर्श के बाद जारी एक संयुक्त बयान में नेताओं ने बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता जताई और चेतावनी दी कि एक अनियंत्रित क्षेत्रीय युद्ध वैश्विक स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए विनाशकारी साबित होगा।
जी7 नेताओं ने इजराइल की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए सभी पक्षों से बदले की कार्रवाई के अंतहीन चक्र को तुरंत रोकने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों को नुकसान पहुंचाने वाली सैन्य कार्रवाइयों से हर हाल में बचा जाना चाहिए।
“क्षेत्रीय संघर्ष किसी के हित में नहीं है। जी7 के नेता सभी क्षेत्रीय ताकतों से जिम्मेदारी से काम करने और अधिकतम संयम बरतने का एकजुट आह्वान करते हैं।” — जी7 नेताओं का पश्चिम एशिया पर संयुक्त घोषणापत्र
लेबनान में तत्काल संघर्षविराम और मानवीय सहायता पर सहमति
चर्चा के केंद्र में लेबनान और इजराइल की सीमा यानी ब्लू लाइन के हालात रहे। जी7 ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 को पूरी तरह लागू करने और अमेरिका व फ्रांस द्वारा प्रस्तावित 21 दिनों के अस्थायी युद्धविराम का पुरजोर समर्थन किया।
बैठक के अंत में सभी नेता वास्तविक समय में कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए। साथ ही उन्होंने संकटग्रस्त नागरिकों के लिए आपातकालीन मानवीय सहायता बढ़ाने और तेहरान के मिसाइल नेटवर्क पर समन्वित प्रतिबंधों पर विचार करने की प्रतिबद्धता जताई।
Frequently Asked Questions
जी7 नेताओं की आपात बैठक किसने बुलाई थी?
यह बैठक जी7 के वर्तमान अध्यक्ष देश इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बुलाई थी।
जी7 ने लेबनान संकट के समाधान के लिए क्या प्रस्ताव रखा?
नेताओं ने तुरंत संघर्षविराम और संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 1701 को पूरी तरह लागू करने की मांग की।





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