साइंस पत्रिका में आज प्रकाशित एक ऐतिहासिक शोध में नासा के न्यू होराइजन्स मिशन वैज्ञानिकों ने निर्णायक प्रमाण प्रस्तुत किए हैं कि प्लूटो भूगर्भीय रूप से सक्रिय है। वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि प्लूटो का प्रसिद्ध 'स्पुतनिक प्लैनिटिया' बेसिन आंतरिक गर्मी द्वारा संचालित नाइट्रोजन संवहन से लगातार बदल रहा है।
शून्य से 233 डिग्री सेल्सियस नीचे के तापमान पर नाइट्रोजन बर्फ पृथ्वी की बर्फ से बहुत अलग व्यवहार करती है। कोर से निकलने वाली रेडियोधर्मी गर्मी के कारण यह गर्म होकर ऊपर उठती है और ठंडी होकर नीचे बैठती है।
सौरमंडल के छोर पर संवहन चक्र
यह अध्ययन स्पुतनिक प्लैनिटिया की 20 से 40 किलोमीटर चौड़ी बहुकोणीय कोशिकाओं के रहस्य को सुलझाता है। कोशिकाओं के केंद्र अपने किनारों से कई मीटर ऊंचे हैं, जो नीचे से ऊपर उठते गर्म बहाव का संकेत हैं।
| भौतिक गुण | मापा गया मान | पृथ्वी से तुलना | वैज्ञानिक महत्व |
|---|---|---|---|
| संवहन परत की गहराई | 8 से 10 किलोमीटर | मेंटल संवहन सेल | सतह का निरंतर नवीनीकरण |
| नवीनीकरण का समय | 5 लाख से 10 लाख वर्ष | महासागरीय रिज फैलाव | गड्ढों का पूर्ण अभाव |
| कोर ताप प्रवाह | 2.5 से 3.2 मिलीवाट/वर्ग मीटर | महाद्वीपीय परत प्रवाह | रेडियोधर्मी आइसोटोप क्षय |
| बर्फ का संयोजन | 98.5% नाइट्रोजन, मीथेन | ध्रुवीय हिमनद मिश्रण | तरल गतिशीलता का नियंत्रण |
कुइपर बेल्ट खगोल-जीवविज्ञान के लिए प्रभाव
यह खोज कुइपर बेल्ट के बर्फीले पिंडों के बारे में वैज्ञानिकों की धारणा को बदलती है। इससे संकेत मिलता है कि सुदूर बौने ग्रहों की गहराई में तरल महासागर मौजूद हो सकते हैं।
“प्लूटो ने ग्रह विज्ञान की परिभाषा बदल दी है। सूर्य से पांच अरब किलोमीटर दूर आंतरिक गर्मी से बर्फ का मंथन साबित करता है कि अंतरिक्ष के अंधेरे में भी भूगर्भीय हलचल जीवित है।”
नासा ने पुष्टि की है कि यह डेटा भविष्य के बाह्य सौरमंडल अभियानों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा।




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