प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पांच भारतीय भाषाओं—मराठी, बंगाली, असमिया, पाली और प्राकृत—को 'शास्त्रीय भाषा' (क्लासिकल लैंग्वेज) का दर्जा देने की मंजूरी दी। इस फैसले से देश में शास्त्रीय भाषाओं की संख्या छह से बढ़कर ग्यारह हो गई है।

इससे पहले तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त था। शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त करने के लिए भाषा के शुरुआती ग्रंथों और इतिहास की प्राचीनता 1500 से 2000 वर्ष पुरानी होना अनिवार्य है, साथ ही उसका मौलिक साहित्यिक परंपरा होना भी आवश्यक है।

प्राचीन साहित्यिक धरोहर को मिला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान

बंगाली को यह दर्जा मिलना प्राचीन चर्यापद गीतों से लेकर रवींद्रनाथ ठाकुर तक की समृद्ध परंपरा का सम्मान है। मराठी को यह सम्मान ज्ञानेश्वरी और प्राचीन शिलालेखी साक्ष्यों के दार्शनिक साहित्य के लिए मिला है, जबकि असमिया 14वीं शताब्दी के माधव कंदली और चर्यापद साहित्य के लिए सम्मानित हुई है।

पाली और प्राकृत भाषाएं भारत के दार्शनिक और आध्यात्मिक चिंतन की मुख्य वाहक रही हैं। बौद्ध और जैन धर्म के मूल ग्रंथ तथा सम्राट अशोक के अनेक ऐतिहासिक शिलालेख इन्हीं भाषाओं में रचे गए थे, जिन्होंने पूरे एशिया के सांस्कृतिक ताने-बाने को आकार दिया।

“मराठी, बंगाली, असमिया, पाली और प्राकृत को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देना हमारे भाषाई पूर्वजों की सभ्यतागत गहराई, दार्शनिक ज्ञान और साहित्यिक प्रतिभा का सच्चा सम्मान है।” — नरेंद्र मोदी, भारत के प्रधानमंत्री

विश्वविद्यालयों में पीठ और उत्कृष्टता केंद्रों की होगी स्थापना

शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से इन भाषाओं के प्रचार-प्रसार और शोध के लिए केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता मिलेगी। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित विद्वानों के लिए वार्षिक पुरस्कार, केंद्रीय उत्कृष्टता केंद्र और विश्वविद्यालयों में विशेष शोध पीठों की स्थापना की जाएगी।

देशभर के साहित्यकारों, सांस्कृतिक संगठनों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। भाषाविदों का मानना है कि इस पहल से प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और युवा पीढ़ी में भाषाई गौरव को बढ़ावा मिलेगा।

Frequently Asked Questions

ताजा फैसले में किन पांच भाषाओं को शास्त्रीय दर्जा दिया गया?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मराठी, बंगाली, असमिया, पाली और प्राकृत को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है।

भारत में अब कुल कितनी शास्त्रीय भाषाएं हो गई हैं?

इन पांच नई भाषाओं के जुड़ने से भारत में शास्त्रीय भाषाओं की कुल संख्या छह से बढ़कर ग्यारह हो गई है।

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