ब्राजील में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' की वापसी में शुक्रवार को एक अप्रत्याशित प्रशासनिक बाधा आ गई, जब सुप्रीम फेडरल कोर्ट (एसटीएफ) के जस्टिस अलेक्जेंड्रे डी मोराएस ने आदेश दिया कि कंपनी ने 2.86 करोड़ रियास (लगभग 52.4 लाख डॉलर) का जुर्माना गलत बैंक खाते में जमा कर दिया है।
एलन मस्क के स्वामित्व वाली सोशल मीडिया कंपनी के वकीलों ने दिन की शुरुआत में शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि सभी लंबित न्यायिक जुर्मानों का भुगतान कर दिया गया है और अगस्त के अंत से देश में लागू प्रतिबंध को तुरंत हटाने का अनुरोध किया था।
बैंकिंग त्रुटि के चलते ब्राजील में एक्स से प्रतिबंध हटाने का फैसला टला
हालांकि, जस्टिस मोराएस ने अपने न्यायिक आदेश में स्पष्ट किया कि कंपनी ने यह राशि अदालत द्वारा निर्दिष्ट बैंको डो ब्राजील के आधिकारिक एस्क्रो खाते में जमा करने के बजाय काइक्सा इकोनोमिका फेडरल बैंक में जमा कर दी थी।
न्यायाधीश ने काइक्सा बैंक को तुरंत पूरी राशि सही अदालती खाते में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया और फैसला सुनाया कि अदालत केवल फंड का उचित हस्तांतरण सत्यापित होने के बाद ही प्लेटफॉर्म को बहाल करने पर विचार करेगी।
“प्लेटफॉर्म की बहाली की किसी भी समीक्षा से पहले, जुर्माने का भुगतान इस अदालत द्वारा कानूनी रूप से नामित विशिष्ट एस्क्रो खाते में प्रभावी होना चाहिए।” — जस्टिस अलेक्जेंड्रे डी मोराएस, सुप्रीम फेडरल कोर्ट ऑफ ब्राजील
अदालती आदेशों के आगे मस्क के झुकने के बावजूद कागजी अड़चनें बरकरार
एक बार जब फंड सही खाते में पहुंच जाएगा, तो मामले को ब्राजील के अटॉर्नी जनरल पाउलो गोनेट के पास औपचारिक राय के लिए भेजा जाएगा, जो अदालत द्वारा प्रतिबंध हटाने का अंतिम चरण होगा।
इस जुर्माने का भुगतान एलन मस्क के लिए एक बड़े कानूनी समझौते का प्रतीक है, जिन्होंने पहले ब्राजील की अदालतों की अवहेलना करने की कसम खाई थी, लेकिन बाद में स्थानीय कानूनी प्रतिनिधि नियुक्त कर और विवादित खातों को ब्लॉक कर सभी शर्तें मान लीं।
Frequently Asked Questions
ब्राजील सुप्रीम कोर्ट ने एक्स पर से प्रतिबंध क्यों नहीं हटाया?
क्योंकि कंपनी ने अपने जुर्माने की रकम बैंको डो ब्राजील के आधिकारिक एस्क्रो खाते के बजाय किसी अन्य बैंक में जमा कर दी थी।
एक्स को दोबारा शुरू करने के लिए अब क्या औपचारिकताएं बाकी हैं?
फंड को सही खाते में ट्रांसफर करना होगा, जिसके बाद अटॉर्नी जनरल की समीक्षा और अदालत का औपचारिक आदेश आवश्यक होगा।





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